Sunday, 18 March 2012

प्रिया की नथ-1

प्रेषक : राजा गर्ग
दोस्तो, मेरी पिछली कुछ कहानियाँ बहुत सराही गई आप लोगों के द्वारा ! जिसमें
प्यारी पूजा
तू तो कुछ कर-1
तू तो कुछ कर-2
तू तो कुछ कर-3
शामिल हैं।
तो मैं आपको अपने जीवनकाल में आई एक और लड़की की कहानी बताने जा रहा हूँ, उस लड़की का नाम प्रिया था, वो मेरे साथ मेरे कॉलेज में पढ़ती थी, वो बिहार की रहने वाली थी और यह बात सच है कि बिहार की लड़कियों को शहर में आकर वहाँ के लड़कों से दोस्ती करने में बड़ा मज़ा आता है। तो प्रिया से मेरी दोस्ती बड़ी आसानी से हो गई। हम पूरे दिन साथ उठते बैठते थे। सब बढ़िया था, वो एक साधारण सी दिखने वाली लड़की थी, उसके मम्मे एकदम बढ़िया आकार में थे, वो बहुत ही खुल कर और सीधी बात करने वाली लड़की थी, मगर वो मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में जानती थी, इसलिए मैं उसके साथ कभी आगे नहीं बढ़ पाया था, मगर शायद आगे कुछ और ही होना था।

बात है हमारे दूसरे साल की, जब हम अपने जूनियर्स को पार्टी देने की तैयारियों में लगे हुए थे और उसको और मेरे को पूरे कार्यक्रम को होस्ट करना था। हम दोनों एक साथ ही प्रेक्टिस करते रहते थे।
मैं कुछ दिन से देख रहा था कि वो मेरी बातों पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी थी और मेरे गंदे से गंदे मजाक पर भी जोर से हंसने लगी थी, मैं समझने लगा था कि उसकी खुजली बढ़ती ही जा रही थी।
खैर जिस दिन पार्टी थी उस दिन प्रिया तैयार होकर आई, काली साड़ी में वो क्या क़यामत लग रही थी ! मेरा मन तो उसे देख कर ही डोल गया, मैंने सोच लिया कि आज इसे प्रपोज़ कर दूंगा और कम से इसकी सारी लिपस्टिक तो खाऊंगा ही।
हम लोगों ने कार्यक्रम ख़त्म किया और कपडे बदलने के लिए ऊपर गए, हम थके हुए थे। मैं प्रिया से कुछ सामान लेने के बहाने से उसके कमरे में चला गया और दरवाज़ा हल्का सा ढाल दिया। मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा- आज तुमने बड़ा अच्छा किया !
और कह कर उसकी आँखों में देखने लगा और हम अनायास ही एक दूसरे के पास खींचते चले गए, मेरे और उसके होंठ मिल गए, हमने चूमना चालू किया। मेरी अन्तर्वासना चरम पर थी, मगर मैंने ड्रामा करने के लिए उसे मना किया- यह सब गलत है !
और मैं उससे अलग हो गया, मगर मैं जनता था कि वो लड़की गर्म हो चुकी थी, उसने मुझसे कहा- "राज, प्लीज़ मुझे छोड़ कर मत जाओ !" वो मुझे राज बुलाती थी।
मैंने मौके की नजाकत को समझा और भाग कर कमरे का दरवाज़ा बंद दिया, फिर मैंने वापस जाकर उसे "आई लव यू" बोला और उसको अपनी तरफ खींच कर बोला- मैं कब से इस बात का इंतज़ार कर रहा था, की कुछ ऐसा हो !
मैंने फिर उसे चूमना चालू किया, उसे चुम्बन करना आता ही नहीं था, सारा मज़ा खराब हो रहा था, वो बस अपने होंठ बंद करे खड़ी थी।
मैं रुका और उससे कहा- ऐसे नहीं ! अगर मज़े लेने हैं तो अपने होंठों को भी चला ! उन्हें खोल कर मेरे होंठ पकड़ने की कोशिश कर !
उसके बाद जो उसके होंठ खाने का मज़ा आया, क्या बताऊँ !
उसके बाद मैंने उसकी साड़ी उतारनी चालू की और उसके मम्मो की आकृति मुझे पागल किये जा रही थी, मैंने कस के उसके मम्मे दबाये और ब्लाउज़ के ऊपर से ही खाने लगा। उसके चुचूक एकदम सख्त हो गए थे, मैं बहुत देर तक उसके मम्मे अपने मुँह से गीले करता रहा, फिर मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन खोले, और उसकी साड़ी उतार कर एक तरफ़ फ़ेंक दी, उसका पेटीकोट ऊपर कर दिया और उसकी पैंटी निकाल दी।
मैंने उसकी पैंटी को सूंघा तो उसमें से गज़ब की महक आ रही थी। मैंने उसकी चूत देखी, उसके आस-पास बाल बहुत थे, मैंने उसकी दोनों टाँगें फ़ैलाई और उसकी चूत में अपना मुँह लगा दिया।
बहुत देर तक चूसा मैंने प्रिया की चूत को !
उसके बाद मैंने उसे ज़मीन पर लिटा दिया, और उससे कहा- बहुत दर्द होगा पहली बार में ! बाहर किसी ने सुन किया तो परेशानी हो जाएगी !
उसकी दोनों टाँगें अपने हाथों में उठाई, अपने लंड पर और उसकी चूत पर थोड़ा थूका, उससे पूछा- डर लग रहा है क्या?
वो बोली- नहीं !
मैंने फिर उसकी चूत के ऊपर लंड रख कर धीरे-धीरे अन्दर दे दिया।
वो तड़पने लगी और आहें भरने लगी। मैंने अगली बार झटके से पूरा लंड अन्दर तक दे दिया।
इस बार वो बोली- आई मम्मी ! मर गई !
और मेरे हाथों को कस के नोच लिया।मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकला, देखा कि उसकी झिल्ली फट गई थी, मैंने उससे बोला- डरना नहीं, पहली बार ऐसा ही होता है !
मैंने उसका ध्यान बंटाने के लिए उसको चूमना चालू कर दिया, और बातों-बातों में फिर उसकी चूत में लंड डाल दिया और वो थोड़ा हड़बड़ाई मगर मैंने लंड फिर बाड़ दिया और उसके होंठ अपने होंठों से बंद कर लिए।
मैंने धीरे-धीरे कई धक्के मारे उसे ! वो अब निढाल हो चुकी थी, उसकी इतनी मुलायम चूत थी, मैं उसे फाड़ना नहीं चाहता था और शायद वो और नहीं झेल पाती इसलिए मैं रुक गया। क्योंकि जो लड़की पहली बार चुदती है, उसे आराम से ही चोदना चाहिए, वरना उसके दिल में डर बैठ जाता है और वो दोबारा चुदना नहीं चाहेगी।
मैंने प्रिया को बोला- अब खड़ी होकर अपने कपड़े ठीक कर ले।
उसने कपड़े ठीक किये और मैं उसके साथ बाहर आ गया।
कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
coolrajaforever@gmail.com

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